Friday, March 29, 2019

खामी बताने पर फेसबुक ने युवक को हॉल ऑफ फेम में जगह दी

शिमला (हिमाचल प्रदेश).  बिलासपुर के साइबर एक्सपर्ट शशांक मेहता को फेसबुक ने अपने सिक्युरिटी फीचर में खामी निकालने पर सम्मानित किया है। साथ ही उन्हें हॉल ऑफ फेम में 15वीं रैंक दी है। इसके अलावा, शशांक को 1 लाख 38 हजार रुपए (2000 यूएस डॉलर) की पुरस्कार राशि भी दी।

शंशाक ने बताया- ब्लॉक अकाउंट को ऑपरेट कर सकते हैं
फेसबुक पर फेक अकाउंट बनाने या किसी दूसरे का फोटो अपने प्रोफाइल में लगाने जैसी कोई भी संदिग्ध एक्टिविटी जब फेसबुक सर्वर की पकड़ में आती है तो फेसबुक उस संबंधित यूजर का अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था। इसके जरिए फेसबुक फेक अकाउंट का गलत इस्तेमाल रोक लेती है। यह अकाउंट तब तक ब्लॉक रहता था, जब तक वास्तविक यूजर अपनी सही पहचान प्रमाणित न करे। शंशाक ने बताया कि इसे फिर भी ऑपरेट किया जा सकता है।

फेसबुक ने माना- खामी है

शशांक ने फेसबुक की सिक्युरिटी टीम को फेक अकाउंट में 'बग' से संबंधित खामी की रिपोर्ट भेजी थी। शशांक ने इस रिपोर्ट में फेसबुक को न केवल बताया, बल्कि साबित भी किया कि सिक्युरिटी चेक प्वाइंट को बाईपास करके भी ब्लॉक किए गए अकाउंट से किस तरह फोटो, मैसेज या अन्य कोई पोस्ट डाली जा सकती है। फेसबुक ने भी माना कि यह एक खामी थी। सोशल नेटवर्किंग साइट ने बीते बुधवार को ही शशांक द्वारा उजागर की गई खामी को भी ठीक कर दिया है।

साइबर सिक्युरिटी के लिए जॉब छोड़ी

बिलासपुर शहर के रौड़ा सेक्टर निवासी यशपाल मेहता और ममता मेहता के बेटे शशांक मेहता ने एलपीयू जालंधर से एमसीए की डिग्री ली है। एक साल तक उन्होंने गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में नेटवर्क एडमिन की जॉब भी की, लेकिन साइबर सिक्युरिटी के जुनून के चलते यह जॉब छोड़ दी।

खेल डेस्क. मुंबई इंडियंस ने गुरुवार को आईपीएल-12 के 7वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 6 रन से हरा दिया। बेंगलुरु को जीत के लिए मैच की आखिरी गेंद पर 7 रन चाहिए थे। स्ट्राइक पर शिवम दुबे थे और लसिथ मलिंगा के हाथ में गेंद थी। मलिंगा ने गेंद फेंकी, उनका पैर क्रीज से बहुत बाहर था। इसके बावजूद अंपायर ने उसे नो बॉल नहीं दिया और मुंबई की जीत पर मुहर लग गई।

अंपायर के इस फैसले से बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली और मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा भी काफी नाराज दिखे। इन दोनों के अलावा कई पूर्व क्रिकेटर्स ने भी फील्ड अंपायर के फैसले से नाराज थे। पूर्व क्रिकेटर्स का कहना है कि इतनी आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद इस तरह की नो बॉल की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अंपयार सुंदरम रवि के खिलाफ अपना गुस्सा निकाला।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ट्वीट किया, ‘इतनी तकनीक के युग और लगातार नजर रखने के बावजूद नो बॉल्स कभी भी मिस नहीं होनी चाहिए।’

इंग्लैंड के एक और पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने ट्वीट किया, ‘जिस तकनीक की दुनिया में हम में जी रहे हैं, वहां ऐसा नहीं होना चाहिए। कहानी का अंत!’

दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम के कप्तान कप्तान फाफ डुप्लेसिस का मत है कि इस तरह के मामलों में थर्ड अंपायर को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘क्रिकेट में ज्यादा से ज्यादा बार तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए... सभी फॉर्मेट में बहुत सारे फ्रंट फुट नो-बॉल हर समय छूट जाते हैं। केवल बल्लेबाज के आउट होने की ही जांच होती है। थर्ड अंपायर को फील्ड अंपायर को बताना चाहिए कि एक नो-बॉल डाली गई है।’

कमेंटेटर और पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने लिखा, ‘मलिंगा के ओवर की आखिरी गेंद नो-बॉल थी। बड़ा मामला है। अंपायर ने इसे मिस कर दिया। भारी गलती। विश्वास नहीं हो रहा।’

आकाश 2013 में भी यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने तब मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच हुए मैच का हवाला देते हुए कहा था, ‘किसी बल्लेबाज के आउट होने की दशा में ही फील्ड अंपायर मामले को थर्ड अंपायर से सलाह लेते हैं। अंपायर यदि अक्सर ऐसी ही नो बॉल मिस कर रहे हैं तब क्यों नहीं तकनीक का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जानी चाहिए।’

Monday, March 25, 2019

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा- मुसलमानों के मामले में भारत पर छा जाती है ख़ामोशी: पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते न्यूज़ीलैंड में मस्जिद में हुए हमले, मलेशिया के प्रधानमंत्री की पाकिस्तान यात्रा, पाकिस्तान दिवस, समझौता एक्सप्रेस बम धमाके केस के फ़ैसले से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात न्यूज़ीलैंड में हुए चरमपंथी हमले की.

न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में शुक्रवार (15 मार्च) को एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे मुसलमानों पर अंधाधुन गोली चलाकर एक व्यक्ति ने 50 लोगों की जान ले ली थी. मरने वालों में नौ पाकिस्तानी भी थे. दुनिया भर के अख़बारों की तरह पाकिस्तान के अख़बारों में भी ये ख़बर पूरे सप्ताह सुर्ख़ियों में रही.

पाकिस्तान ने दुनिया भर में इस्लाम धर्म से बढ़ रही नफ़रत को कम करने और उस पर क़ाबू पाने के लिए मलेशिया और तुर्की के साथ मिलकर तीन देशों का एक संयुक्त फ़्रन्ट बनाने का सुझाव दिया है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान की यात्रा पर आए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मोहम्मद के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ ख़ौफ़ और दुश्मनी फैलाई जा रही है और इससे लड़ने के लिए पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की को साथ आना होगा.

 इस मौक़े पर महातीर मोहम्मद ने कहा कि इस्लाम से नफ़रत का जवाब ताक़त से नहीं मोहब्ब्त से देना चाहिए.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत एक तरफ़ तो इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी का हिस्सा बनना चाहता है लेकिन मुसलमानों के मामले में जब बोलने का मौक़ा आता है तो भारत पर ख़ामोशी छा जाती है. कुरैशी ने कहा कि क्राइस्टचर्च मस्जिद पर हुए हमले की निंदा करते हुए भी भारत ने न तो मस्जिद का ज़िक्र किया और न ही एक बार भी मुसलमानों का नाम लिया.

शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल एसेंम्बली का विशेष अधिवेशन बुलाकर इस्लामोफ़ोबिया पर प्रभावी क़ानून बनाया जाना चाहिए.

अख़बार जंग के अनुसार न्यूज़ीलैंड मस्जिद में हुए हमले के बाद इस्लामी देशों के समूह ओआईसी की कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक को संबोधित करते हुए क़ुरैशी ने ये बातें कहीं. क़ुरैशी ने कहा कि ओआईसी की बैठक में जो छह प्रस्ताव पास किए गए उनमें चार प्रस्ताव पाकिस्तान की तरफ़ से आए थे.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार ओआईसी ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इस्लाम के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वालों को भी दहश्तगर्द क़रार दिया जाए.

पाकिस्तान हर साल 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस मनाता है. दरअसल 23 मार्च 1940 को लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए भारत से अलग एक देश बनाने का प्रस्ताव पास किया था. 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद वहां हर साल 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस मनाया जाता है.

भारत ने एक तरफ़ तो इस दिन होने वाले किसी भी तरह के आयोजन का बहिष्कार किया था, दूसरी तरफ़ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान ख़ान को बधाई संदेश भेजा था. पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने इसे प्रमुखता से छापा था.

अख़बार जंग के अनुसार नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में मनाए गए पाकिस्तान दिवस के जश्न में भारत सरकार का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ और न ही इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग का कोई अधिकारी पाकिस्तान में मनाए गए जश्न में शामिल हुआ.

वहीं अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने ट्वीट के ज़रिए मोदी के संदेश को सार्वजनिक किया. इमरान ख़ान ने मोदी के संदेश का स्वागत करते हुए कहा कि समय आ गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता शुरू की जाए.

पाकिस्तान दिवस के मौक़े पर सभी अख़बारों में संपादकीय और विशेष लेख छपे हैं. अख़बार नवा-ए-वक़्त में क़य्यूम निज़ामी ने एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि पाकिस्तान को एक नए प्रस्ताव की ज़रूरत है. उनके अनुसार 22 करोड़ पाकिस्तानियों को लाहौर स्थित मीनार-ए-पाकिस्तान पर जमा होकर एक नए प्रस्ताव को पारित करना चाहिए. वहीं शाहिद रशीद ने एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि लाहौर प्रस्ताव अभी अधूरा है और जब तक कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाकर ही प्रस्ताव को पूरा किया जा सकता है.

फ़रवरी 2007 में भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में धमाका हुआ था जिसमें 70 लोग मारे गए थे. मरने वालों में 43 पाकिस्तानी नागरिक थे.

इस मामले में चारों अभियुक्तों को भारत की अदालत ने सुबूत न होने की बुनियाद पर बरी कर दिया है.

पाकिस्तान ने इस पर सख़्त नाराज़गी जताई है. अख़बार दुनिया ने इस पर संपादकीय लिखा है. अख़बार लिखता है कि इस फ़ैसले से भारत की न्यायिक प्रणाली की क़लई खुल गई है.

अख़बार के अनुसार भारत की सरकार पाकिस्तान से ये मांग करती रही है कि वो मुंबई हमले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे लेकिन ख़ुद उसकी अपनी हालत ये है कि भारत की अदालत अपने गुनाह क़ुबूल करने वाले को भी रिहा करने पर मजबूर है.

Monday, March 18, 2019

मनोहर पर्रिकर की वो आख़िरी तमन्ना जो अधूरी रह गई

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर के निधन के बाद गोवा का कौन मुख्यमंत्री बनेगा इस पर अभी काफ़ी संशय बना हुआ है.

उनकी मौत के साथ ही इस छोटे से राज्य में गठबंधन सरकार पर भी संकट के बादल घिर आए हैं.

पर्रिकर केंद्रीय रक्षा मंत्री के पद से मार्च 2017 में इस्तीफ़ा दे चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री बनकर अपने गृह राज्य लौट गए थे.

हालांकि अभी इस बात पर अटकलें लग रही हैं कि उनके बाद राज्य का मुख्यमंत्री कौन होगा लेकिन पर्रिकर ने पहले ही घोषित कर दिया था कि ये उनका अंतिम कार्यकाल है और आगे से चुनाव नहीं लड़ेंगे.

उन्होंने एक टीवी चैनल से एक बार कहा था, "मैं अपनी ज़िंदगी के अंतिम 10 साल ख़ुद के लिए जीना चाहता हूं. मैंने राज्य को काफ़ी कुछ वापस दिया है. मैं इस कार्यकाल के बाद मैं चुनाव लड़ने या चुनाव का हिस्सा नहीं बनूंगा, चाहे पार्टी की ओर से कितना ही दबाव आए."

लेकिन पर्रिकर की ये ख़्वाहिश अधूरी ही रह गई और शाम पांच बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. केंद्र सरकार ने उनके निधन पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

हालांकि राज्य की राजनीति से वो दो साल अलग रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर वो केंद्र में रक्षा मंत्री बनना स्वीकार किया था.

1989 में 1% भी नहीं मिला था बीजेपी को वोट
मापुसा में गौर सारस्वत ब्राह्मण परिवार में जन्मे पर्रिकर शुरुआती जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे.

उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से मैटलर्जी में डिग्री हासिल की और गोवा में ही उन्होंने न्यूमेटिक पंप बनाने वाली फैक्ट्री खोली.

1980 के दशक में जब बीजेपी गोवा को लेकर गंभीर हुई तो उसने संघ से कुछ कैडर मांगे. संघ ने पर्रिकर और लक्ष्मीकांत पारसेकर को बीजेपी में भेजा.

1961 में पुर्तगालियों से आज़ाद होने के बाद से ही गोवा में महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) का शासन था, जिसका वहां की पिछड़ी जातियों में काफ़ी मज़बूत जनाधार था.

लक्ष्मीकांत पारसेकर का परिवार भी एमजीपी का कट्टर समर्थक था, लेकिन पारसेकर ने अलग रास्ता चुना.

1989 में बीजेपी चुनाव में गई तो उसे एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले.

लेकिन राजनीतिक सूझबूझ और सांगठनिक कौशल के बूते एक दशक में ही पर्रिकर ने पार्टी को सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई.

साल 2000 में वो पहली बार मुख्यमंत्री बने. इससे कुछ ही दिन पहले ल्यूकीमिया से पीड़ित अपनी पत्नी को खो दिया था.

एक ईमानदार छवि और कड़ी मेहनत करने वाले राजनेता के रूप में उनकी छवि प्रशासन में सुधार लाने में काफ़ी मददगार साबित हुई.

आधी बांह की शर्ट और पैरों में सैंडल उनकी सादगी की प्रतीक बन गई. लेकिन इन सबसे अहम थी उनकी चुपचाप काम करने की शैली.

इस दौरान सड़कें बनीं, पानी और बिजली की आपूर्ति में सुधार हुआ और इन शुरुआती सालों में उनके पसंदीदा सामाजिक कल्याण की कई योजनाओं की शुरुआत हुई.

लेकिन विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने कांग्रेस नीत दिगम्बर कामत की सरकार को मांडवी नदी में कैसिनों के सवाल पर बैकफुट पर आने को मज़बूर किया.

राज्य में अवैध खनन का मुद्दा बनाना हो या अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों को सरकारी अधिक अनुदान देने का मामला हो पर्रिकर ने जनता से जुड़ी समस्याओं को मुद्दा बनाया.

आख़िरकार 2012 में खनन मामले में जीत हासिल हुई. कोर्ट ने इस पर बैन लगा दिया. लेकिन इस बीच कैसिनों का मुद्दा बना रहा.

लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 2013 में पर्रिकर का नाम सुर्खियों में आया जब उन्होंने पार्टी के सम्मेलन में असमंजस की शिकार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सामने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम चुनाव प्रमुख के रूप में आगे प्रस्तावित कर दिया.

हालांकि उस समय नरेंद्र मोदी का चुनाव प्रचार अभियान का मुखिया बनाए जाने को लेकर लालकृष्ण आडवाणी की ओर से काफ़ी विरोध था.

लेकिन पर्रिकर और आडवाणी के रिश्ते भी बहुत अच्छे नहीं थे. 2009 में पर्रिकर ने आडवाणी के बारे में कहा था कि वो 'बासी' और 'सड़ता हुआ अचार' हैं जिनकी 'राजनीतिक पारी कमोबेश ख़त्म' हो चुकी है.

ये बात उन्होंने कोंकणी भाषा के न्यूज़ चैनल से कही थी. उनका कहना था कि अब नई उम्र के लोगों को नेतृत्व में आने देना चाहिए.

बहरहाल, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी केंद्र की सत्ता में आई.

बीजेपी नीत एनडीए सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोहर पर्रिकर को गोवा का मुख्यमंत्री पद छोड़कर कैबिनेट में शामिल करने का ऑफ़र दिया.

उन्हें रक्षा मंत्री का कार्यभार संभालने को कहा गया. कैबिनेट में एक ऐसे भरोसेमंद चेहरे की ज़रूरत थी जो लंबे समय से अधर में लटके मंत्रालय के कई मुद्दों का जल्द निपटारा कर सके.

रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने सबसे पहले रक्षा सामानों की ख़रीद प्रक्रिया को आसान बनाने का काम किया.

जब पर्रिकर केंद्र में चले आए तो गोवा में उनकी जगह पारसेकर को मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुक़सान हुआ.

बीजेपी को 2017 के विधानसभा चुनाव में केवल 13 सीटें मिल पाईं. पर्रिकर के बिना बीजेपी को जनता का बहुत समर्थन नहीं मिल पाया.

पर्रिकर नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए राज्य में लौट आए और परस्पर विरोधी हितों वाली पार्टियों का एक बेमेल गठबंधन हुआ.

और इस गठबंधन को जोड़े रखने का एक मात्र कारण पर्रिकर दिखाई दे रहे थे.

पिछले साल फ़रवरी में जब उन्हें अचानक अस्पताल में भर्ती कराया गया, तभी से लोग अटकलें लगा रहे थे कि उनकी जगह कौन लेगा.

Friday, March 15, 2019

#Balakot में भारत के हमले से पाकिस्तान ने क्या सबक़ लिया?

पाकिस्तान की सरकार और सैन्य रणनीतिकारों ने पाकिस्तान और भारत के बीच हालिया तनाव से कुछ अहम नतीजे निकाले हैं.

ये पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के हवाले से कुछ ख़तरों को भी सामने लाते हैं. रणनीतिकारों के मुताबिक, "इन ख़तरों को परमाणु शक्ति के इस्तेमाल के संदर्भ में नज़रअंदाज़ करना ख़ुद को मारने के ही बराबर होगा."

इतनी तेज़ी से कैसे बढ़ा तनाव?

परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसियों के बीच पैदा हुए हालिया जंगी माहौल में पाकिस्तान ने पहला और सबसे अहम सबक इस हक़ीक़त की सूरत में सीखा है कि दोनों देशों की सैन्य ताक़त का टकराव संकट शुरू होते ही आख़िरी हदों तक पहुंच गया. इसे एक ख़तरनाक प्रवृत्ति और प्रतीक समझा जा रहा है.

इस ख़तरनाक स्थिति को पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने इन शब्दों में बयान किया, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बयान के मुताबिक 27 फ़रवरी की रात भारत का मिसाइल से हमले करने का इरादा था. पाकिस्तान और भारत में तनाव की इस इंतहा को निचले दर्जे पर लाना होगा ताकि ख़तरनाक नतीजों की संभावनों को कम किया जा सके. "

हालिया माहौल पूर्व की घटनाओं के मुक़ाबले काफ़ी अलग साबित हुआ है. साल 2002 में जब दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के आमने-सामने आईं तब भारत को अपनी सेना को हरकत में लाने में कम से कम 27 दिन लगे थे.

इस दौरान वो सैन्य कार्रवाइयां करने वाले अपने दस्तों को पाकिस्तान की सीमा तक लाया था. दूसरी ओर पाकिस्तान को अपनी सेना को सीमा तक लाने में इससे भी ज़्यादा समय लगा था.

पाकिस्तानी मीडिया में जारी होने वाली सूचनाओं से पता चलता है कि 26 फ़रवरी को भारत के 12 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा को पार करके उन इलाक़ों में अपना पे-लोड गिराया जो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत का हिस्सा हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर लड़ाकू विमानों की 'डॉगफ़ाइट' भी हुई. भारतीय हमलावर लड़ाकू विमानों में मिग 21 और रूस निर्मित एसयू 30 लड़ाकू विमान शामिल थे. पाकिस्तानी वायु सेना ने एलओसी पर की गई जबावी कार्रवाई में कुछ ही घंटों में भारतीय लड़ाकू विमान को मार गिराया.

इस बारे में पाकिस्तानी वायु सेना ने आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों से पता चलता है कि इस कार्रवाई में पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से बने स्वदेशी लड़ाकू विमान जेएफ़-17 थंडर का इस्तेमाल किया था.

ख़तरनाक और अहम बात ये है कि भारत के एसयू-30 और पाकिस्तान के जेएफ़-थंडर, ये दोनों ही लड़ाकू विमान परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखते हैं. दोनों ही देशों की वायु सेनाओं के पास ये क्षमता नहीं है कि तुरंत इस बात का पता कर लें कि हमलावर लड़ाकू विमान परमाणु हथियारों से लैस है या नहीं.

जब रडार किसी हमलावर विमान का पता लगाएगा तो ये ही माना जाएगा कि वो अपने साथ परमाणु हथियार भी ला रहा होगा. दोनों ही देशों की वायु सेनाएं हमलावर लड़ाकू विमान के बारे में यही शक करेंगी.

ठीक इसी तरह पाकिस्तानी सेना के लिए भी ये जान लेना संभव नहीं है कि उसके ख़िलाफ़ दाग़े जाने वाले मिज़ाइल पारपंरिक हथियारों से लैस हैं या परमाणु हथियारों से. जैसा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने भाषण में बताया था कि उनके पास इंडिया जैसी रिपोर्ट थी कि नियंत्रण रेखा के पास बहावलपुर सेक्टर में जैश-ए-मोहम्मद को नुक़सान पहुंचाने के लिए मिसाइल से हमला होना था. इसी तरह की जानकारी कई अन्य सूत्रों के हवाले से भी सामने आई थी.

पाकिस्तान और भारत की सेनाएं किसी दाग़े गए मिसाइल का पता तब ही लगा सकती हैं जब वो उनकी अपनी सरहद में दाख़िल हो जाए. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में मिसाइल को ख़त्म करने के लिए देश के पास सिर्फ़ चार मिनट का ही समय होता है.

पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक इतिहास में जब भी सैन्य तनाव या जंगी माहौल पैदा हुआ तब वो तुरंत ही आख़िरी हदों तक नहीं पहुंचा था बल्कि तनाव धीरे-धीरे बढ़ा था. लेकिन इस बार हालात बिलकुल अलग थे जिसमें दोनों ही सेनाएं शुरुआत में ही आख़िरी विकल्पों तक पहुंच गईं.

भारत के बयान पर यक़ीन करती है दुनिया

पाकिस्तान ने इन हालात से अपने लिए दूसरा सबक ये सीखा है कि तनाव के दौरान दुनिया भारत की इस मांग पर सहमत होती नज़र आती है कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन से आतंकवादियों के नेटवर्क को ख़त्म करे.

भारत प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दावा के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सरकार की ओर से की गई हालिया कार्रवाइयों को महज़ अंतरराष्ट्रीय दबाव का नतीजा ही मानता है.

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान के नीति निर्माताओं को इस हक़ीक़त को समझने की ज़रूरत है कि सरकार के ढांचे से बाहर से काम करने वाले संगठनों (नॉन स्टेट एक्टर्स) की वजह से पाकिस्तान की कोशिशों का वो फल भी ज़ाया हो सकता है जो उसने बड़ी महेनत से दहशतगर्दी के ख़ात्मे की ज़द्दोजहद में हासिल किया है.

भारत के लड़ाकू विमानों के पाकिस्तान के वायुक्षेत्र का उल्लंघन करने पर पाकिस्तान के क़रीबी दोस्त भी इस बार खुल कर सामने नहीं आए. इन हालातों ने पाकिस्तानी सरकार और सेना को तेज़ी से कार्रवाई पर आमदा किया कि ऐसे तत्व उनकी उस मेहनत पर भी पानी फेर रहे हैं जो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के अलग अलग संगठनों के ख़िलाफ़ की थी.

Monday, March 11, 2019

चरमपंथियों को मुख्यधारा में वापसी पर नौकरी और मासिक भत्ताः प्रेस रिव्यू

जम्मू कश्मीर में मुख्यधारा की तरफ लौटने वाले चरमपंथियों की वापसी के लिए मसौदा तैयार किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर में बताया गया है कि चरमपंथियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक नया मसौदा तैयार किया गया है. इस मसौदे के तहत नौकरी, और मासिक भत्ता शामिल किया गया है.

ख़बर में बताया गया है कि इस मसौदे के तहत मुख्यधारा में शामिल होने वाले चरमपंथियों को 6 हज़ार रुपए मासिक भत्ता और नौकरी देने की बात कही गई है.

हालांकि गंभीर अपराधों में शामिल चरमपंथियों को यह सुविधा नहीं दी जाएगी. फिलहाल यह महज़ मसौदा है और इसे राज्य के गृह मंत्रालय और मुख्य सचिव के पास भेजा जाना है.

ओडिशा में लोकसभा चुनाव के लिए बीजू जनता दल 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देगी.

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घोषणा की है कि वे लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देंगे.

केंद्रापाड़ा में महिलाओं की एक रैली में उन्होंने यह घोषणा की. इसके साथ ही अब ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में सात पर बीजद की महिला उम्मीदवार उतरेंगी.

हालांकि, पटनायक ने विधानसभा चुनाव के लिए इस तरह की घोषणा नहीं की. ओडिशा में लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा के चुनाव भी होने है.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अब पूरी तरह से चुनावी अभियान शुरू कर दिया है और इसकी शुरुआत उन्होंने बीजेपी मुख्यालय पर धरने के साथ की है.

द हिंदु में प्रकाशित में समाचार में बताया गया है कि आम आदमी पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस से कहा है कि वे दिल्ली के पूर्ण राज्य के मुद्दे पर खुलकर सामने आएं. रविवार को आप पार्टी ने बीजेपी के मुख्यालय के बाहर धरना भी दिया.

इस बीच लोकसभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातें अभी भी चल रही हैं. हालांकि दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित इससे इंकार कर चुकी हैं.

पूर्वी दिल्ली में रविवार शाम को एक चलती कार में आग लगने से एक महिला और उनकी 2 बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई.

दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार के मुताबिक,रविवार शाम को अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन के सामने फ्लाईओवर पर चलती कार में अचानक भीषण आग लग गई.

इस आग में मां और उनकी दो बेटियों की जलने से मौत हो गई. जबकि कार चला रहे महिला के पति और एक बेटी किसी तरह समय रहते बाहर निकल गए.

Monday, March 4, 2019

#Balakot एयर स्ट्राइक में जैश के 250 आतंकवादी मारे गए: बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह

भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथी कैम्प पर एयर स्ट्राइक करने का दावा किया था. लेकिन भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर अबतक ये नहीं बताया गया कि इस हमले में कितने चरमपंथी मारे गए.

लेकिन रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी एक रैली में दावा किया कि एयर स्ट्राइक में "250 से ज़्यादा" आतंकवादी मारे गए थे.

वो सत्तारूढ़ पार्टी के पहले नेता हैं जिन्होंने इस हमले में चरमपंथियों की मौत के आंकड़े को लेकर बयान दिया है.

हालांकि कोयंबटूर में सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष बीएस धनोआ ने कहा, "ऐसे हमलों में हम कितने लोग मरे, ये नहीं गिन सकते थे. ये हमारा काम नहीं है. हम केवल यह गिन पाते हैं कि कितने टारगेट को निशाना बनाया. हमें जो टारगेट मिला, उसे हमने हिट किया."

उन्होंने ये भी कहा कि हम अगर जंगल में बम गिरा आते तो पाकिस्तानी फ़ाइटर प्लेन हमारा पीछा क्यों करते.

अहमदाबाद में एक जनसभा में अमित शाह ने गुजराती में कहा, "उरी के बाद हमारे सुरक्षाबल पाकिस्तान गए और सर्जिकल स्ट्राइक की. उन्होंने हमारे सैनिकों की मौत का बदला लिया. पुलवामा के बाद हर कोई सोच रहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक नहीं होगी, क्या होगा? लेकिन मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 13 दिन बाद एयर स्ट्राइक की और 250 से ज़्यादा आतंकियों को मार दिया."

बीजेपी भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक का राजनीतिकरण करने की बात से इनकार करती रही है.

अमित शाह के दावे पर सवाल
इससे पहले शनिवार को बीजेपी के अन्य नेता और केंद्रीय मंत्री एसएस आहलूवालिया ने मीडिया पर "अपुष्ट आंकड़े" देने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या सरकार के किसी प्रवक्ता या अमित शाह ने कोई आंकड़ा नहीं दिया है तो मीडिया क्यों अपुष्ट आंकड़े चला रहा है.

मीडिया रिपोर्ट्स में करीब 300 चरमपंथियों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है. इस बीच अमित शाह के दावे पर विपक्ष सवाल उठा रहा है.

अमित शाह के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने बीजेपी प्रमुख पर एयर स्ट्राइक का राजनीतिक फायदा लेने का आरोप लगाया.

उन्होंने ट्वीट किया, "वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी आरजीके कपूर ने कहा था कि चरमपंथियों की मौत का कोई आंकड़ा देना जल्दबाज़ी होगी. लेकिन अमित शाह कह रहे हैं कि एयर स्ट्राइक में 250 चरमपंथी मारे गए. क्या ये एयर स्ट्राइक का राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश नहीं है?"

14 फ़रवरी को सीआरपीएफ के काफ़िले पर आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 40 से अधिक जवान मारे गए. इस हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी.

जिसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तान स्थित कैम्प पर हमला करने का दावा किया था.

पाकिस्तान ने इस हमले में किसी के हताहत होने की बात से इनकार किया था.