देश में सबसे ज़्यादा समय तक मुख्यमंत्री का पद संभालने का रिकॉर्ड बनाने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने डोकलाम विवाद पर उनकी सरकार के साथ सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं किया.
साल 2017 में सिक्किम के साथ लगने वाली चीनी सीमा पर भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद को लेकर गतिरोध पैदा हुआ था.
भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया था.
भूटान और चीन दोनों इस क्षेत्र पर अपना हक़ जताते हैं. लेकिन भारत हमेशा भूटान का समर्थन करता आया है.
ये वही इलाका है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं.
बीबीसी बांग्लासेवा के संवाददाता शुभज्योति घोष ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के साथ एक इमेल इंटरव्यू किया है.
सवालः डोकलाम विवाद के बाद से भारत की रणनीतिक योजनाओं में सिक्किम की एक अहम जगह बन गई है. सिक्किम पर इस मुद्दे क्या असर पड़ा?
सिक्किम सरकार को डोकलाम के मुद्दे पर सूचनाओं के आदान-प्रदान में शामिल नहीं किया गया. हमें जो भी कुछ पता चला वह टीवी चैनल और न्यूज़पेपर से पता चला. ऐसे में सिक्किम के लोगों में डोकलाम के मुद्दे की वजह से डर की स्थिति बनी हुई थी. लेकिन हमारी सरकार देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए प्रतिबद्ध थी.
डोकलाम मुद्दा देश की सुरक्षा के लिए एक भारी ख़तरा था. इस संघर्ष का सबसे पहला असर सिक्किम पर पड़ता. लेकिन इससे एक सकारात्मक बात भी हुई. आप जानते हैं कि सिक्किम साल 1975 में ही भारत का हिस्सा बना.
तब से हम कोशिश कर रहे हैं सिक्किमवासी राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो सकें. हमारा नारा भी यही है- 'देश हमारा हिंदुस्तान, सिक्किम हमारा सुखिस्तान.' और डोकलाम गतिरोध के बाद सिक्किमवासियों के मन में देशभक्ति की प्रबल भावना पैदा हुई है.
सवालः पश्चिम बंगाल का आरोप है कि सिक्किम सरकार के कदमों की वजह से तीस्ता नदी सूख रही है क्योंकि सिक्किम सरकार ने नदी पर कई हायडल पॉवर प्लांट और जलाशय बनाए हैं. आपका इस पर क्या कहना है?
हमारा विकास का मॉडल मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों के दीर्घकालिक इस्तेमाल पर आधारित है. लेकिन हम ये मानते हैं कि पर्यावरण की कीमत पर विकास कभी भी नहीं हो सकता. सिक्किम में कई पॉवर प्रोजेक्ट्स हैं लेकिन मात्र सात परिवार इनकी वजह से बेघर हुए हैं. हम पर्यावरण के प्रति भी चिंतित हैं. और हमने इन परियोजनाओं को ज़िम्मेदारी के साथ बनाते हुए दूसरे प्रदेशों की चिंताओं का भी ध्यान रखा है.
सवालः गोरखालैंड आंदोलन पर आपका क्या रुख है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार कहती आई है कि आपकी सरकार अलगाववादियों के प्रति नरम है?
गोरखालैंड आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी हाइवे पर जाम लगा रहे थे. मैंने उनका समर्थन इसलिए किया था ताकि मैं उनका भरोसा जीत सकूं जिससे वे एनएच 10 हाइवे को जाम न करें क्योंकि ये हाइवे सिक्किम के लिए जीवनरेखा जैसा है.
हालांकि, मैं इसे पश्चिम बंगाल का आंतरिक मामला मानता हूं. हम पश्चिम बंगाल की सरकार के साथ सहयोग बनाए रखेंगे और मुख्यमंत्री ने भी इस हाइवे पर किसी तरह आवागमन सुचारू गति से चलाने का आश्वासन दिया है.
सवालः सिक्किम भारत में इकलौता ऐसा राज्य है जो तीन ओर से विदेशी मुल्कों से घिरा है. एक तरफ चीन, दूसरी तरफ नेपाल तो तीसरी ओर भूटान. ऐसे में सिक्किम का अपने अंतरराष्ट्रीय पड़ोसियों को लेकर क्या रुख है?
साल 1994 में जब मैं सत्ता में आया तो एक नारा दिया- 'देश हमारा हिंदुस्तान, सिक्किम हमारा सुखिस्तान', सिक्किम के लोग भावनात्मक रूप से और भौगोलिक रूप से भारत के साथ जुड़े हुए हैं. सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों और सीमावर्ती राज्यों में सिक्किम सबसे शांत प्रदेश है और ये इस बात का उदाहरण बन सकता है कि सांप्रदायिक समन्वय और शांति कैसे कायम की जाए.
Wednesday, January 23, 2019
Tuesday, January 15, 2019
मोदी को मिला 'मार्केटिंग गुरु' अवार्ड क्या है?
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के ज़रिए बताया कि उन्हें 'देश की निस्वार्थ सेवा, आर्थिक और सामाजिक तौर पर देश का विकास करने के लिए' फ़िलिप कोट्लर प्रेसिडेन्शियल अवार्ड दिया गया है.
उनकी वेबसाइट में बताया गया है कि ये अवार्ड पहली बार किसी को दिया गया है और प्रधानमंत्री के ब्लॉग के अनुसार इसके मूल में जो भावना है वो 'पीपल, प्रोफ़िट एंड प्लानेट' (लोग, लाभ और धरती) से प्रेरित है.
फिलिप कोट्लर अवार्ड की वेबसाइट के अनुसार मार्केटिंग, कम्यूनिकेशन और बिज़नेस मैनेजमेन्ट की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने वालों को सम्मानित करने के लिए ये दिया जाता है.
मोदी के ट्विटर हैंडल पर तस्वीरें आने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने इसके लिए उन्हें बधाई दी और इसे सम्मानजनक कहा.
उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी को फिलिप कोट्लर प्रेसिडेन्शियल अवार्ड मिलने की बधाई. ये इतना जाना माना अवार्ड है कि इसके लिए ना तो कोई ज्यूरी है, ना ही पहले कभी किसी को दिया गया है ओर इसके पीछे अलीगढ़ की एक कंपनी है जिसका नाम आज तक कोई नहीं जानता."
इसके कुछ देर बाद स्मृति ईरानी के इसके उत्तर दिया और लिखा, "ये टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की है जिनके परिवार ने खुद ही भारत रत्न लेने का फैसला लिया था."
ख़ैर नेताओं के तानों के बीच ये बात साफ़ हो गई कि, इस 'फिलिप कोट्लर अवार्ड' ने ये बहस तो छेड़ दी है कि आख़िर ये अवॉर्ड है क्या और क्या पहली बार ये किसी को दिया गया है.
फिलिप कोट्लर कौन हैं?
ये अवॉर्ड प्रोफेसर फिलिप कोट्लर के नाम पर आधारित है जो अमरीका के जॉर्जिया में मौजूद केलॉग्स स्कूल ऑफ़ मैनेजमेन्ट में बीते 50 साल से मार्केटिंग पढ़ाते हैं.
केलॉग्स युनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार कोट्लर ने हार्वर्ड और शिकागो युनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और बाद में एमआईटी से उन्होंने डॉक्टरेट की (1956) उपाधि मिली है.
87 साल के फिलिप कोटलर को 'मॉडर्न मार्केटिंग का जनक' और 'मार्केटिंग गुरु' भी कहा जाता है.
माना जाता है कि उनकी लिखी सबसे अहम किताब उनकी आत्मकथा 'माय एडवेन्चर्स इन मार्केटिंग' है जिसमें मार्केटिंग के भविष्य के बारे में बताया गया है.
कोट्लर अवार्ड की वेबसाइट के अनुसार जो संस्था ये अवार्ड देती है उसका नाम है वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप. ये कनाडा के टोरंटो में एक स्वतंत्र संस्था है जिसकी स्थापना फिलिप कोट्लर ने साल 2010 में की थी.
अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग संगठन के अनुसार 6 दिसंबर 2017 को पहली बार 'कोट्लर अवॉर्ड' दिया गया था. ये कार्यक्रम दक्षिण कोरिया के शिला होटल में आयोजित किया गया था.
लेकिन पहली बार इस साल 'फिलिप कोट्लर प्रेसिडेन्शियल अवार्ड' दिया गया है जिसके लिए मोदी को चुना गया है.
वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों में फिलिप कोट्लर मार्केटिंग फोरम का आयोजन करती है. 14 दिसंबर 2018 में भारत में फोरम का आयोजन किया गया था.
इसके लिए भारत में ससलेन्स रिसर्च इंटरनेशन इंस्टीट्यूट के साथ हाथ मिलाया था जो 6 सितंबर 2017 में अस्तित्व में आई थी. यानी इसे आज 1 साल 4 महीने मात्र हुए हैं.
भारतीय कंपनियों के बारे में जानकारी रखने वाली वेबसाइट जॉबा के अनुसार अलीगढ़ के दोदपुर में मौजूद ससलेन्स कंपनी कानपुर में पंजीकृत है.
कंपनी के वेबसाइट के अनुसार कंपनी ने कोट्लर इम्पैक्ट के साथ क़रार किया है जिसके अनुसार तीन साल तक वो भारत में इस फोरम का आयोजन करने वाली है.
हालांकि उन्होंने जिस @WMC_India के हैंडल को अपने ट्वीट में टैग किया है उस पर अब तक कुछ पोस्ट नहीं किया गया है.
इस हैंडल का एक ही फॉलोअर है और ये 9 लोगों को फॉलो करता है जो सभी बड़े भारतीय व्यवसायी हैं.
मोदी को अवार्ड दिए जाने की वजह कुछ-कुछ साफ़ होती है प्रोफेसर मार्क ओप्रेस्निक के ट्वीट से. मार्क ओप्रेस्निक कोट्लर इम्पैक्ट कंपनी के चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर हैं.
उन्होंने ट्वीट किया है, "आने वाले वक्त में जब भारत में फोरम का आयोजन होगा उस वक्त आपसे मुलाक़ात की इच्छा है."
उनकी वेबसाइट में बताया गया है कि ये अवार्ड पहली बार किसी को दिया गया है और प्रधानमंत्री के ब्लॉग के अनुसार इसके मूल में जो भावना है वो 'पीपल, प्रोफ़िट एंड प्लानेट' (लोग, लाभ और धरती) से प्रेरित है.
फिलिप कोट्लर अवार्ड की वेबसाइट के अनुसार मार्केटिंग, कम्यूनिकेशन और बिज़नेस मैनेजमेन्ट की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने वालों को सम्मानित करने के लिए ये दिया जाता है.
मोदी के ट्विटर हैंडल पर तस्वीरें आने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने इसके लिए उन्हें बधाई दी और इसे सम्मानजनक कहा.
उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी को फिलिप कोट्लर प्रेसिडेन्शियल अवार्ड मिलने की बधाई. ये इतना जाना माना अवार्ड है कि इसके लिए ना तो कोई ज्यूरी है, ना ही पहले कभी किसी को दिया गया है ओर इसके पीछे अलीगढ़ की एक कंपनी है जिसका नाम आज तक कोई नहीं जानता."
इसके कुछ देर बाद स्मृति ईरानी के इसके उत्तर दिया और लिखा, "ये टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति की है जिनके परिवार ने खुद ही भारत रत्न लेने का फैसला लिया था."
ख़ैर नेताओं के तानों के बीच ये बात साफ़ हो गई कि, इस 'फिलिप कोट्लर अवार्ड' ने ये बहस तो छेड़ दी है कि आख़िर ये अवॉर्ड है क्या और क्या पहली बार ये किसी को दिया गया है.
फिलिप कोट्लर कौन हैं?
ये अवॉर्ड प्रोफेसर फिलिप कोट्लर के नाम पर आधारित है जो अमरीका के जॉर्जिया में मौजूद केलॉग्स स्कूल ऑफ़ मैनेजमेन्ट में बीते 50 साल से मार्केटिंग पढ़ाते हैं.
केलॉग्स युनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार कोट्लर ने हार्वर्ड और शिकागो युनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और बाद में एमआईटी से उन्होंने डॉक्टरेट की (1956) उपाधि मिली है.
87 साल के फिलिप कोटलर को 'मॉडर्न मार्केटिंग का जनक' और 'मार्केटिंग गुरु' भी कहा जाता है.
माना जाता है कि उनकी लिखी सबसे अहम किताब उनकी आत्मकथा 'माय एडवेन्चर्स इन मार्केटिंग' है जिसमें मार्केटिंग के भविष्य के बारे में बताया गया है.
कोट्लर अवार्ड की वेबसाइट के अनुसार जो संस्था ये अवार्ड देती है उसका नाम है वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप. ये कनाडा के टोरंटो में एक स्वतंत्र संस्था है जिसकी स्थापना फिलिप कोट्लर ने साल 2010 में की थी.
अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग संगठन के अनुसार 6 दिसंबर 2017 को पहली बार 'कोट्लर अवॉर्ड' दिया गया था. ये कार्यक्रम दक्षिण कोरिया के शिला होटल में आयोजित किया गया था.
लेकिन पहली बार इस साल 'फिलिप कोट्लर प्रेसिडेन्शियल अवार्ड' दिया गया है जिसके लिए मोदी को चुना गया है.
वर्ल्ड मार्केटिंग समिट ग्रुप हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों में फिलिप कोट्लर मार्केटिंग फोरम का आयोजन करती है. 14 दिसंबर 2018 में भारत में फोरम का आयोजन किया गया था.
इसके लिए भारत में ससलेन्स रिसर्च इंटरनेशन इंस्टीट्यूट के साथ हाथ मिलाया था जो 6 सितंबर 2017 में अस्तित्व में आई थी. यानी इसे आज 1 साल 4 महीने मात्र हुए हैं.
भारतीय कंपनियों के बारे में जानकारी रखने वाली वेबसाइट जॉबा के अनुसार अलीगढ़ के दोदपुर में मौजूद ससलेन्स कंपनी कानपुर में पंजीकृत है.
कंपनी के वेबसाइट के अनुसार कंपनी ने कोट्लर इम्पैक्ट के साथ क़रार किया है जिसके अनुसार तीन साल तक वो भारत में इस फोरम का आयोजन करने वाली है.
हालांकि उन्होंने जिस @WMC_India के हैंडल को अपने ट्वीट में टैग किया है उस पर अब तक कुछ पोस्ट नहीं किया गया है.
इस हैंडल का एक ही फॉलोअर है और ये 9 लोगों को फॉलो करता है जो सभी बड़े भारतीय व्यवसायी हैं.
मोदी को अवार्ड दिए जाने की वजह कुछ-कुछ साफ़ होती है प्रोफेसर मार्क ओप्रेस्निक के ट्वीट से. मार्क ओप्रेस्निक कोट्लर इम्पैक्ट कंपनी के चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर हैं.
उन्होंने ट्वीट किया है, "आने वाले वक्त में जब भारत में फोरम का आयोजन होगा उस वक्त आपसे मुलाक़ात की इच्छा है."
Monday, January 14, 2019
धमाके के बाद कुंभ में फैलती चली गई आग, सुनें चश्मदीदों की जुबानी
प्रयागराज में दिगंबर अखाड़े के टेंट में आग लग गई जिससे दर्जन भर टेंट राख हो गए. टेंट में शरण लिए श्रद्धालुओं के कई सामान जल गए. दमकलकर्मी और एनडीआरएफ की टीम मौके पर मौजूद है और आग पर काबू पा लिया गया है.
आग का कारण एलपीजी सिलेंडर बताया जा रहा है. टेंट में लोग खाना बनाने के लिए सिलेंडर का उपयोग करते हैं. आशंका जताई जा रही है कि खाना बनाते वक्त आग फैल गई और कई टेंट को अपनी चपेट में ले लिया. घटना दिगंबर अखाड़े की है जहां आसपास के 10 टेंट हादसे की चपेट में आ गए. हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. प्रत्यक्षदर्शी एक साधु ने बताया कि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है और पिछली बार आग की जो घटना हुई थी उससे चार गुना बड़ा हासदा इस बार हुआ है.
एक और प्रत्यक्षदर्शी साधु दुर्गादास ने बताया कि तंबू में सिलेंडर से आग लगी और दमकल की गाड़ियों को 10 से 20 मिनट लगे पहुंचने में जिससे उनका सारा समान जलकर राख हो गया. जबकि साधु के ठीक बगल में खड़े एक एसएसबी जवान ने बताया कि मुश्किल से आधा मिनट लगा होगा दमकल की गाड़ी आने और आग बुझाने का काम शुरू करने में.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जलने वाले सामान में साधुओं के कंबल, बिस्तर और भंडारे की सामग्री है. कई साधुओं ने मांग की अब सरकार को चाहिए कि नुकसान की भरपाई करे ताकि साधु समाज को कोई परेशानी न हो. मौके पर एक श्रद्धालु ने बताया कि साधु जन खाना खाकर लेटे हुए थे तभी आग लग गई जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
कुंभ के सूचना निदेशक शिशिर ने बताया कि आग सिलेंडर में आग के कारण लगीं और फिलहाल इस पर काबू पा लिया गया है. उन्होंने कहा कि कुंभ आने वाले लोगों को टेंट से दूर सिलेंडर ले जाकर खाना बनाने की अनुमति रहती है लेकिन टेंट के अंदर ऐसी कोई इजाजत नहीं है. कुंभ प्रशासन के सूचना निदेशक ने बताया कि संभव है टेंट में लोग खाना बना रहे हों और हवा चलने से आग फैल गई हो. शिशिर ने बताया कि सुरक्षा की एडवायजरी कुंभ के श्रद्धालुओं की जारी की जाती है लेकिन उसका उल्लंघन होने से ऐसा हादसा हो गया.
घटना के बारे में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मी घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग के कारणों का पता लगा रहे हैं. आज हवा भी काफी तेज है और पश्चिम से पूरब की तरफ हवाएं चल रही हैं जिसके चलते यहां की घास-फूस की झोंपड़ी और कुटिया में आग लग गई. खाने-पीने के सामान और कपड़े जल गए हैं. किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है. पुलिस अधिकारी ने बताया आग बुझाने के बाद दमकल गाड़ियों और कुछ एंबुलेंस को वापस भेज दिया गया है. हादसे की जगह व्यवस्था बहाल करने में पुलिसकर्मी और साधुजन लगे हैं.
वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.
हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.
बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है. बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.
आग का कारण एलपीजी सिलेंडर बताया जा रहा है. टेंट में लोग खाना बनाने के लिए सिलेंडर का उपयोग करते हैं. आशंका जताई जा रही है कि खाना बनाते वक्त आग फैल गई और कई टेंट को अपनी चपेट में ले लिया. घटना दिगंबर अखाड़े की है जहां आसपास के 10 टेंट हादसे की चपेट में आ गए. हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. प्रत्यक्षदर्शी एक साधु ने बताया कि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है और पिछली बार आग की जो घटना हुई थी उससे चार गुना बड़ा हासदा इस बार हुआ है.
एक और प्रत्यक्षदर्शी साधु दुर्गादास ने बताया कि तंबू में सिलेंडर से आग लगी और दमकल की गाड़ियों को 10 से 20 मिनट लगे पहुंचने में जिससे उनका सारा समान जलकर राख हो गया. जबकि साधु के ठीक बगल में खड़े एक एसएसबी जवान ने बताया कि मुश्किल से आधा मिनट लगा होगा दमकल की गाड़ी आने और आग बुझाने का काम शुरू करने में.
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जलने वाले सामान में साधुओं के कंबल, बिस्तर और भंडारे की सामग्री है. कई साधुओं ने मांग की अब सरकार को चाहिए कि नुकसान की भरपाई करे ताकि साधु समाज को कोई परेशानी न हो. मौके पर एक श्रद्धालु ने बताया कि साधु जन खाना खाकर लेटे हुए थे तभी आग लग गई जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
कुंभ के सूचना निदेशक शिशिर ने बताया कि आग सिलेंडर में आग के कारण लगीं और फिलहाल इस पर काबू पा लिया गया है. उन्होंने कहा कि कुंभ आने वाले लोगों को टेंट से दूर सिलेंडर ले जाकर खाना बनाने की अनुमति रहती है लेकिन टेंट के अंदर ऐसी कोई इजाजत नहीं है. कुंभ प्रशासन के सूचना निदेशक ने बताया कि संभव है टेंट में लोग खाना बना रहे हों और हवा चलने से आग फैल गई हो. शिशिर ने बताया कि सुरक्षा की एडवायजरी कुंभ के श्रद्धालुओं की जारी की जाती है लेकिन उसका उल्लंघन होने से ऐसा हादसा हो गया.
घटना के बारे में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मी घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग के कारणों का पता लगा रहे हैं. आज हवा भी काफी तेज है और पश्चिम से पूरब की तरफ हवाएं चल रही हैं जिसके चलते यहां की घास-फूस की झोंपड़ी और कुटिया में आग लग गई. खाने-पीने के सामान और कपड़े जल गए हैं. किसी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है. पुलिस अधिकारी ने बताया आग बुझाने के बाद दमकल गाड़ियों और कुछ एंबुलेंस को वापस भेज दिया गया है. हादसे की जगह व्यवस्था बहाल करने में पुलिसकर्मी और साधुजन लगे हैं.
वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रायबरेली से सोनिया गांधी के सामने अजय अग्रवाल को मैदान में उतारा था. मोदी लहर के बावजूद वो सोनिया के सामने कड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके थे. लेकिन बीजेपी को करीब पौने दो लाख वोट मिले थे. इसके बाद जब 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2 और एक सीट पर सपा को जीत मिली थी.
हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.
बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है. बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.
Monday, January 7, 2019
उत्तर प्रदेश: अवैध हिरासत में दलित की मौत, ना संवेदना मिली ना सहायता
जिस बालकिशन को हवालात से छुड़ाने के लिए ये पैसे उन्हें कथित तौर पर पुलिस अधिकारी को रिश्वत के तौर देने थे, उनकी लाश का अब पोस्टमार्टम होना है.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले की धनौरा तहसील में बसी मुस्तकमपुर गांव के रहने वाले बालकिशन की पुलिस की अवैध हिरासत में संदिग्ध हालात में बीते बुधवार को मौत हो गई थी.
बालकिशन के परिवार का आरोप है कि धनौरा थाने की पुलिस ने उन्हें चार दिन तक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया.
पुलिसवाले अभियुक्त बनाए गए
थाने के एसएचओ अरविंद मोहन शर्मा, सब-इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय, सिपाही विनीत चौधरी, सिपाही जितेंद्र बांसले, सिपाही विवेक काकराज, हेड मोहर्रिर रविंद्र राणा समेत थाने के अन्य कर्मचारियों को बालकिशन की हत्या के केस में अभियुक्त बनाया गया है.
परिवार के सभी आरोपों पर अमरोहा के पुलिस उपाधीक्षक ब्रजेश सिंह कहते हैं, "परिवार की शिकायत के आधार पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया है. अन्य सभी आरोपों की जांच गजेटेड अधिकारी से कराई जा रही है."
ब्रजेश सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालकिशन की मौत की वजह 'दिल का दौरा' बताया गया है.
वहीं बालकिशन के परिवार का आरोप है कि उन्हें अवैध हिरासत में प्रताड़ित किया गया जिसकी वजह से उनकी जान गई.
37 वर्षीय बालकिशन इको कार चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे. उनकी करीबी रिश्तेदार गुड्डी के मुताबिक रविवार देर शाम जब वो लौट रहे थे तब पुलिस ने दस्तावेज़ों की जांच के लिए उनकी कार रोकी. बालकिशन के पास पूरे दस्तावेज़ नहीं होने पर पुलिस ने कार ज़ब्त कर ली और उन्हें थाने में बिठा लिया.
गुड्डी कहती हैं, "हम अगले दिन थाने गए और पुलिस से उन्हें छोड़ने के गुहार लगाई. जब उन्होंने छोड़ने से इनकार किया तो हमने कहा कि अदालत में पेश करके जेल भेज दो हम ज़मानत करा लेंगे लेकिन पुलिस ने हमसे पांच लाख रुपए रिश्वत की मांग की."
गुड्डी के मुताबिक चौबीस घंटे अवैध हिरासत में रखने के बाद भी जब बालकिशन को न जेल भेजा गया और न छोड़ा गया तो परिवार रिश्वत की व्यवस्था करने लगा.
वो कहती हैं, "यार-रिश्तेदारों से पैसे लिए, ब्याज़ पर क़र्ज़ लिया, छोटा-मोटा सामान बेचकर किसी तरह एक लाख रुपए की व्यवस्था की. मंगलवार शाम हम ये पैसे लेकर थाने पहुंचे. इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय ने पैसे लेने के बाद कहा कि एक लाख रुपए कल और लेकर आना और उन्हें ले जाना."
उनका कहना है, "बुधवार को जब हम एक लाख रुपए और लेकर थाने पहुंचे तो हमें बताया गया कि बालकिशन की तबियत ख़राब हो गई है और उन्हें ज़िला अस्पताल ले जाया गया है. अस्पताल पहुंचे तो हमें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है."
गुड्डी जब बालकिशन की लाश लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी, तब भी वो एक लाख रुपए उनके पास थे. वो रोते हुए कहती हैं, "ये कौन सा क़ानून है जो ग़रीबों की जान ले रहा है. ब्याज़ पर क़र्ज़ लेकर भी जान नहीं बच पा रही है."
बालकिशन की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिस दौरान एसडीएम की गाड़ी भी तोड़ दी गई थी.
वहीं बालकिशन की पत्नी कुंती पति की मौत के बाद सुधबुध खो चुकी हैं. रोते-रोते आवाज़ उनके गले में दबी रह जाती है. बहुत कोशिश करके वो इतना ही कह पाती हैं, "मेरे छोटे-छोटे बच्चों का अब क्या होगा. उन्हें इंसाफ़ मिलना चाहिए."
उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले की धनौरा तहसील में बसी मुस्तकमपुर गांव के रहने वाले बालकिशन की पुलिस की अवैध हिरासत में संदिग्ध हालात में बीते बुधवार को मौत हो गई थी.
बालकिशन के परिवार का आरोप है कि धनौरा थाने की पुलिस ने उन्हें चार दिन तक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया.
पुलिसवाले अभियुक्त बनाए गए
थाने के एसएचओ अरविंद मोहन शर्मा, सब-इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय, सिपाही विनीत चौधरी, सिपाही जितेंद्र बांसले, सिपाही विवेक काकराज, हेड मोहर्रिर रविंद्र राणा समेत थाने के अन्य कर्मचारियों को बालकिशन की हत्या के केस में अभियुक्त बनाया गया है.
परिवार के सभी आरोपों पर अमरोहा के पुलिस उपाधीक्षक ब्रजेश सिंह कहते हैं, "परिवार की शिकायत के आधार पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया है. अन्य सभी आरोपों की जांच गजेटेड अधिकारी से कराई जा रही है."
ब्रजेश सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालकिशन की मौत की वजह 'दिल का दौरा' बताया गया है.
वहीं बालकिशन के परिवार का आरोप है कि उन्हें अवैध हिरासत में प्रताड़ित किया गया जिसकी वजह से उनकी जान गई.
37 वर्षीय बालकिशन इको कार चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे. उनकी करीबी रिश्तेदार गुड्डी के मुताबिक रविवार देर शाम जब वो लौट रहे थे तब पुलिस ने दस्तावेज़ों की जांच के लिए उनकी कार रोकी. बालकिशन के पास पूरे दस्तावेज़ नहीं होने पर पुलिस ने कार ज़ब्त कर ली और उन्हें थाने में बिठा लिया.
गुड्डी कहती हैं, "हम अगले दिन थाने गए और पुलिस से उन्हें छोड़ने के गुहार लगाई. जब उन्होंने छोड़ने से इनकार किया तो हमने कहा कि अदालत में पेश करके जेल भेज दो हम ज़मानत करा लेंगे लेकिन पुलिस ने हमसे पांच लाख रुपए रिश्वत की मांग की."
गुड्डी के मुताबिक चौबीस घंटे अवैध हिरासत में रखने के बाद भी जब बालकिशन को न जेल भेजा गया और न छोड़ा गया तो परिवार रिश्वत की व्यवस्था करने लगा.
वो कहती हैं, "यार-रिश्तेदारों से पैसे लिए, ब्याज़ पर क़र्ज़ लिया, छोटा-मोटा सामान बेचकर किसी तरह एक लाख रुपए की व्यवस्था की. मंगलवार शाम हम ये पैसे लेकर थाने पहुंचे. इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय ने पैसे लेने के बाद कहा कि एक लाख रुपए कल और लेकर आना और उन्हें ले जाना."
उनका कहना है, "बुधवार को जब हम एक लाख रुपए और लेकर थाने पहुंचे तो हमें बताया गया कि बालकिशन की तबियत ख़राब हो गई है और उन्हें ज़िला अस्पताल ले जाया गया है. अस्पताल पहुंचे तो हमें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है."
गुड्डी जब बालकिशन की लाश लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी, तब भी वो एक लाख रुपए उनके पास थे. वो रोते हुए कहती हैं, "ये कौन सा क़ानून है जो ग़रीबों की जान ले रहा है. ब्याज़ पर क़र्ज़ लेकर भी जान नहीं बच पा रही है."
बालकिशन की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिस दौरान एसडीएम की गाड़ी भी तोड़ दी गई थी.
वहीं बालकिशन की पत्नी कुंती पति की मौत के बाद सुधबुध खो चुकी हैं. रोते-रोते आवाज़ उनके गले में दबी रह जाती है. बहुत कोशिश करके वो इतना ही कह पाती हैं, "मेरे छोटे-छोटे बच्चों का अब क्या होगा. उन्हें इंसाफ़ मिलना चाहिए."
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