जिस बालकिशन को हवालात से छुड़ाने के लिए ये पैसे उन्हें कथित तौर पर पुलिस अधिकारी को रिश्वत के तौर देने थे, उनकी लाश का अब पोस्टमार्टम होना है.
उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले की धनौरा तहसील में बसी मुस्तकमपुर गांव के रहने वाले बालकिशन की पुलिस की अवैध हिरासत में संदिग्ध हालात में बीते बुधवार को मौत हो गई थी.
बालकिशन के परिवार का आरोप है कि धनौरा थाने की पुलिस ने उन्हें चार दिन तक गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया.
पुलिसवाले अभियुक्त बनाए गए
थाने के एसएचओ अरविंद मोहन शर्मा, सब-इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय, सिपाही विनीत चौधरी, सिपाही जितेंद्र बांसले, सिपाही विवेक काकराज, हेड मोहर्रिर रविंद्र राणा समेत थाने के अन्य कर्मचारियों को बालकिशन की हत्या के केस में अभियुक्त बनाया गया है.
परिवार के सभी आरोपों पर अमरोहा के पुलिस उपाधीक्षक ब्रजेश सिंह कहते हैं, "परिवार की शिकायत के आधार पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया है. अन्य सभी आरोपों की जांच गजेटेड अधिकारी से कराई जा रही है."
ब्रजेश सिंह का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालकिशन की मौत की वजह 'दिल का दौरा' बताया गया है.
वहीं बालकिशन के परिवार का आरोप है कि उन्हें अवैध हिरासत में प्रताड़ित किया गया जिसकी वजह से उनकी जान गई.
37 वर्षीय बालकिशन इको कार चलाकर परिवार का गुज़ारा करते थे. उनकी करीबी रिश्तेदार गुड्डी के मुताबिक रविवार देर शाम जब वो लौट रहे थे तब पुलिस ने दस्तावेज़ों की जांच के लिए उनकी कार रोकी. बालकिशन के पास पूरे दस्तावेज़ नहीं होने पर पुलिस ने कार ज़ब्त कर ली और उन्हें थाने में बिठा लिया.
गुड्डी कहती हैं, "हम अगले दिन थाने गए और पुलिस से उन्हें छोड़ने के गुहार लगाई. जब उन्होंने छोड़ने से इनकार किया तो हमने कहा कि अदालत में पेश करके जेल भेज दो हम ज़मानत करा लेंगे लेकिन पुलिस ने हमसे पांच लाख रुपए रिश्वत की मांग की."
गुड्डी के मुताबिक चौबीस घंटे अवैध हिरासत में रखने के बाद भी जब बालकिशन को न जेल भेजा गया और न छोड़ा गया तो परिवार रिश्वत की व्यवस्था करने लगा.
वो कहती हैं, "यार-रिश्तेदारों से पैसे लिए, ब्याज़ पर क़र्ज़ लिया, छोटा-मोटा सामान बेचकर किसी तरह एक लाख रुपए की व्यवस्था की. मंगलवार शाम हम ये पैसे लेकर थाने पहुंचे. इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय ने पैसे लेने के बाद कहा कि एक लाख रुपए कल और लेकर आना और उन्हें ले जाना."
उनका कहना है, "बुधवार को जब हम एक लाख रुपए और लेकर थाने पहुंचे तो हमें बताया गया कि बालकिशन की तबियत ख़राब हो गई है और उन्हें ज़िला अस्पताल ले जाया गया है. अस्पताल पहुंचे तो हमें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है."
गुड्डी जब बालकिशन की लाश लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी, तब भी वो एक लाख रुपए उनके पास थे. वो रोते हुए कहती हैं, "ये कौन सा क़ानून है जो ग़रीबों की जान ले रहा है. ब्याज़ पर क़र्ज़ लेकर भी जान नहीं बच पा रही है."
बालकिशन की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिस दौरान एसडीएम की गाड़ी भी तोड़ दी गई थी.
वहीं बालकिशन की पत्नी कुंती पति की मौत के बाद सुधबुध खो चुकी हैं. रोते-रोते आवाज़ उनके गले में दबी रह जाती है. बहुत कोशिश करके वो इतना ही कह पाती हैं, "मेरे छोटे-छोटे बच्चों का अब क्या होगा. उन्हें इंसाफ़ मिलना चाहिए."
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